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| एक ऐसी दुनिया में जहाँ हर कोई रफ्तार, प्रसिद्धि और सफलता के पीछे भाग रहा है, सोनिया गोयल हमें ठहरकर सोचने का निमंत्रण देती हैं। यह एक उपदेश देने वाली पुस्तक नहीं है-यह जीवन के वास्तविक अनुभवों का एक सच्चा दर्पण है। आगरा के एक पारंपरिक परिवार से लेकर इक्वेंटिस में डायरेक्टर और चीफ हैप्पीनेस ऑफिसर बनने तक की अपनी यात्रा में सोनिया रिश्तों, संस्कृति, आस्था, नारी-शक्ति, मौन, कर्म और निस्वार्थ सेवा पर आधारित अपने आत्मीय अनुभव साझा करती हैं। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं, अपने गुरुजी के मार्गदर्शन और घर व कार्यस्थल से जुड़े जीवन्त प्रसंगों के माध्यम से वे हमें सहजता से याद दिलाती हैं कि जीवन केवल उपलब्धियों का नाम नहीं है-यह अर्थ, संतुलन और गरिमा के साथ जी जाने वाली एक यात्रा है। चाहे आपकी उम्र 18 वर्ष हो या 38, यह किताब हर उस व्यक्ति के लिए एक शांत सहयात्री है जो इस शोरगुल भरी दुनिया में जीवन की गहराई तलाशना चाहता है। |
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